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लायन्स क्लबों द्वारा मिसाइल मैन पूर्व राष्ट्रपति डाॅ अब्दुल कलाम को श्रद्धासुमन अर्पित



नवलगढ़ -आज अलायन्स क्लब नवलगढ़ के तत्वावधान में स्थानीय एस.एन बी.एड काॅलेज प्रांगण में क्लब द्वारा स्थापित डाॅ अब्दुल कलाम की मूर्ति पर उनकी  पुण्यतिथि पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किये गये। इस अवसर पर पूर्व अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ दयाशंकर  जांगिड काॅलेज प्राचार्या डाॅ तारा सैनी, एस.एन स्कूल के प्रिंसीपल डाॅ मोहनसिंह, पूर्व मल्टीपल चेयरमैन मोहनलाल सैनी, प्रांतपाल अब्दुल जब्बार खोखर,  सह प्रांतपाल जगदीश  प्रसाद जांगिड, क्लब अध्यक्ष सुहित पाडिया, कोषाध्यक्ष के.के डीडवानिया, पंकज शाह,  प्रभलाल सैनी, जयराम जांगिड, रामकुमार सिंह  राठौड़, सीताराम गुरूजी, फूलचंद सैनी अशोक  पूनिया व काॅलेज स्टाफ द्वारा पुष्प अर्पित किये गये।
डाॅ जांगिड ने बताया कि विद्यार्थियों के प्रेरणा स्रोत डाॅ कलाम की मूर्ति भामाशाह  गिरधारीलाल जांगिड कोलसिया के सौजन्य से बनाकर साम्प्रदायिक सौहार्द का उदाहरण पेश  किया है। इस परिसर में स्वामी विवेकानंद व जौहारमल जी जिन्होने महिला शिक्षा की अलख 125 वर्ष पहले जगाई थी उनकी मूर्तियां स्थापित की गई है। डाॅ मोहनसिंह ने अपने उदबोधन में डाॅ कलाम साहब को गरीबों का मसीहा विश्व  प्रसिद्ध मिसाइल मैन व विद्यार्थियों के प्रेरणा स्रोत बताया। प्रांतपाल खोखर ने बताया कि वे बहुत ही गरीब घर में जन्म लेकर देश  की उंचाइयों तक अपनी मेहनत व ईमानदारी व दृढ ईच्छा से पहुंचे। शिक्षाविद फूलचंद सैनी ने कहा कि देश  में वे पहले राष्ट्रपति है जो निर्विरोध चुने गये और अपनी योग्यता से पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन  किया। जगदीश  प्रसाद जांगिड ने कलाम साहब के आकर्षक उदाहरण पेश  किये। समाजसेवी शिक्षक  रामकुमार सिंह राठौड ने बताया कि एक समय कलाम साहब डिप्रेशन  मे आ गये थे और आत्महत्या करने नदी किनारे पहुंच गये वहां पर एक महात्मा ने उनके इरादों को समझ लिया और वे उनको अपने आश्रम में ले गये उनको चिंता मुक्त किया। उसने आशीर्वाद  से वे सतत प्रगति करते रहे और एक आदर्ष हिंदुस्तानी का जीवन निर्वाह किया। जाति धर्म उंच नीच आदि से वे बहुत दूर थे। भारत की जन्मभूमि से उनको असीम प्यार था। उन्होने जीवन पर्यन्त उसको निभाया। वे स्कूल काॅलेज व विद्यार्थियों के प्रेरक थे। अक्सर वे वहां अपना प्रवचन करने जाते और अंत समय एक काॅलेज मे भाषण करते हुये हदय गति के शिकार  हुये और परलोक सिधार गये। यूएनओ ने उनकी याद में उनके जन्मदिन 15 अक्टूबर को विद्यार्थी दिवस मनाने की स्वीकृति दी। ऐसे हिंदुस्तानी को शत शत नमन। देशवासी  व युवा उनसे प्रेरणा लेते रहेंगे। धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य डाॅ तारा सैनी ने दिया।