डूण्डलोद । डूण्डलोद पब्लिक स्कूल, डूण्डलोद के विधालय परिसर में आज रवींद्रनाथ टैगोर जयंती मनायी गई। इस अवसर पर अध्यापिका कनक शीला डे ने टैगोर के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला।
प्राचार्य जी.प्रकाश ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर सबके जीवन में उत्साह भरने वाले कवि और गायक थे। साहित्य में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले वे पहले गैर यूरोपियन थे। आमतौर पर उन्हें आधुनिक भारत का साधारण सृजनशील कलाकार माना जाता है।
विधालय सचिव बी.एल.रणवां ने अपने उद्बोधन में कहा कि रवीन्द्र नाथ टैगारे बांग्ला कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, निबंधकार तथा चित्रकार थे। भारत के संदर्भ में टैगोर ने सुझाव दिया था कि भारत भले ही पिछड़ा हो परन्तु मानवीय मूल्यो में उसमें पिछडापन नहीं होना चाहिए। भारत भी विश्व का मार्गदर्शन कर मानवीय एकता में आदर्श को प्राप्त कर सकता है। भारत का अतीत यह सिद्ध करता है कि भौतिक सम्पन्नता की चिंता किए बिना भारत ने आध्यात्मिक चेतना का सफलतापूर्वक प्रचार किया है।
