विकास कनवा
जीएसटी पर अपने अनुभव व सुझावों से सरकार को रूबरू कराने के लिए जीएसटी मंथन का आयोजन
दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लव में मंगलवार 19 सितंबर 2017 को दिल्ली में जमा होंगे देश भर के कारोबारी, विधि विशेषज्ञ और कर सलाहकार !
नई दिल्ली । एक जुलाई से देशभर में शुरू हुई नई कर व्यवस्था माल एवं सेवा कर (जीएसटी) पर व्यापारियों के विचारों व उनके अनुभवों से सरकार को रूबरू कराने के लिए जीएसटी मंथन का आयोजन किया जा रहा है। फेडरेशन आफ आल इंडिया व्यापार मंडल के नेतृत्व में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में देश के सभी छोटे-बड़े कारोबारियों व लघु उद्यमियो को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम में जीएसटी के विशेषज्ञों, चार्टड एकाउंटेंटस और कानून के जानकारों को विशेष रूप से बुलाया गया है ताकि व्यापारियों को जीएसटी से आ रही परेशानियों को सूचीबद्ध कर इसके हल के लिए सरकार को रूबरू कराया जा सके।
व्यापार मंडल के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधेश्याम शर्मा व राष्ट्रीय महामंत्री वी के वंसल ने बताया कि देश में नई कर व्यवस्था के क्रियान्वयन हुए दो महीने से अधिक का समय बीत चुका है। इस दौरान बड़ी संख्या में देश भर का व्यापारी समुदाय इससे जुड़ चुका है और यह सिलसिला अभी भी जारी है। चूंकि कर प्रणाली नई है। इसलिए इससे जुड़़ी समस्याएं भी पहली दफा व्यापारियों के सामने आ रही हैं। ये ऐसी समस्याएं हैं जिनका समाधान अभी विशेषज्ञों और चार्टेड एकाउंटेंट के पास भी नहीं है। वे इसके अध्ययन में लगे हुए हैं। उधर सरकार की ओर से भी फिलहाल ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जिससे जीएसटी से जुड़ी कर संबंधी तकनीकी दिक्कतों का समाधान हो सके। लिहाजा देश भर के व्यापारियों को आमंत्रित कर नई कर प्रणाली से जुड़े उनके विचारो, अनुभवों और परेशानियों से सरकार को रूबरू कराने के लिए व्यापार मंडल ने जीएसटी मंथन का आयोजन किया है।
दोनो नेताओ ने बताया कि जीएसटी परिषद से आग्रह के बावजूद अभी भी कई जिन्सों की जीएसटी दरें अव्यवहारिक हैं। एक ही व्यवसाय में दो से तीन तरह की दरें लागू हैं। जिसे लेकर व्यापारी खासे परेशान हैं। यही नहीं जीएसटी रिटर्न फाइल करने में भी कारोबारियों को काफी परेशानी आ रही है। कई दफा जीएसटी का सर्वर ही काम नहीं करता। लिहाजा सरकार को दो दफा रिटर्न की तारीख भी बढ़ानी पड़ी है। व्यापारियों की इन्हीं सब परेशानियों और उनसे प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर, यह महसूस किया जा रहा है कि नई कर प्रणाली को लेकर व्यापारियों के प्रश्नो के प्रामाणिक समाधान के लिए सरकार की ओर से ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। यही नहीं जिला स्तर पर बड़ा अभियान चलाकर व्यापारियों से सीधे संपर्क कर उनकी छोटी-बड़ी समस्याओं का हल निकालना भी जरूरी है जो सरकार द्वारा ही किया जा सकता है।
दरअसल जीएसटी कर की दरें, एचएसएन कोड्स की प्रयोज्यता, रिवर्स प्रभार के इम्पलीकेशन, सही इनवॉइस बनाने एवं इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने इत्यादि को लेकर भ्रम एवं असमंजस की स्थिति आदि व्यापारियों के ज्वलंत मुद्दे हैं। साथ ही जीएसटी के तहत विभिन्न टैक्स स्लैब में विसंगतियों, असमानताओं और विरोधाभास मौजूद हैं। इसके अलावा, 28% की स्लैब पर पुनः विचार करने और कई वस्तुओं को इस स्लैब के नीचे कम टैक्स के दायरे में लाए जाने की भी जरूरत है। व्यापार मंडल के राष्ट्रीय प्रवक्ता चार्टेड एकाउंटेंट राजेश्वर प्रसाद पेन्युली के मुताबिक जीएसटी मंथन मे एचएसएन कोड की प्रयोज्यता एवं इसका अमल में लाया जाना, रिवर्स चार्ज और इनपुट क्रेडिट, लेखा एवं अभिलेखों का रखरखाव, करों का भुगतान करने की देनदारी, अग्रिम विनिर्णय, इत्यादि भी जीएसटी के अंतर्गत ऐसे ही कुछ अन्य क्षेत्र है। जिन पर व्यापारियों, जीएसटी विशेषज्ञों, चार्टेड एकाउंटेटस और कर सलाहकार उपरोक्त मुद्दो पर अपने अनुभव, विचार एवं सुझाव रखेंगे। व्यापार मंडल व्यापारियों और विशेषज्ञों के जीएसटी पर उनके अनुभव और सुझावों को सरकार के समक्ष पेश करेगी ताकि इसका समाधान निकल सके।
