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बांसवाड़ा में ग्रामीण विकास में अनियमितताओं पर प्रशासन की कार्यवाही

रिपोर्ट - विकास कनवा 
राजकीय राशि के अपव्यय पर एक सचिव निलंबित, 
तीन दोषियों के विरूद्ध एफआईआर
बांसवाड़ा-ग्रामीण विकास में अनियमितताओं पर जिला प्रशासन द्वारा सख्त कार्यवाही की जा रही है। जिले की ग्राम पंचायत मुंद्री में राजकीय राशि के अपव्यय की अनियमितता पर ग्राम पंचायत के सचिव को निलंबित किया गया वहीं तीन दोषियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी दिए गए हैं।  
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी परशुराम धानका ने बताया कि पंचायत समिति आनन्दपुरी की ग्राम पंचायत मुंद्री तहत ग्राम पंचायत के कार्मिकों ने राज्य वित्त चतुर्थ योजनान्तर्गत वित्तीय स्वीकृति से चबूतरा व अन्य निर्माण करवाकर राजकीय राशि का अपव्यय किया जाना पाया गया था। इसके तहत मुन्द्री गांव में मुन्द्री माता के पास चबुतरा निर्माण, आम्बा गांव में चबुतरा निर्माण, पुंजा खुलड़ी गांव में माता के पास चबुतरा निर्माण व खुटा गांव में माताजी मंदिर के पास चबुतरा निर्माण में राजकीय राशि का अपव्यय पाया गया था।  इसमें प्रत्येक कार्य के लिए 1 लाख 70 हजार की स्वीकृति थी, जिसमें प्रत्येक कार्य में 1 लाख 67 हजार 400 रुपए व्यय किए गए। चारों कामों का कुल मिलाकर 6 लाख 69 हजार 600 रुपए की राशि का अपव्यय किया गया था।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी धानका ने तत्कालिन ग्राम सेवक पदेन सचिव ग्राम पंचायत मुन्द्री अनिल जोशी जो कि हाल पंचायत समिति अरथूना की नवाधरा ग्राम पंचायत में ग्राम सेवक पदेन सचिव पद पर है,को तुरन्त प्रभाव से निलम्बित किया है। निलम्बन के दौरान जोशी का मुख्यावास पंचायत समिति बांसवाड़ा रहेगा। इसके साथ ही धानका ने तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता महीपाल कटारा, तत्कालिन ग्राम सेवक पदेन सचिव अनिल जोशी व तत्कालीन सरपंच श्रीमती धनी देवी को कारण बताओ नोटिस जारी कर इस मामले में अपना स्पष्टीकरण देने के लिए आदेशित किया है।
एफआईआर दर्ज करने के निर्देश: 
धानका ने बताया कि कनिष्ठ अभियंता के राजकीय राशि के दुरूपयोग को लेकर शासन उप सचिव को निलम्बन का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है वहीं आनन्दपुरी के विकास अधिकारी ने तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता महीपाल कटारा, तत्कालिन ग्राम सेवक पदेन सचिव अनिल जोशी व तत्कालीन सरपंच श्रीमती धनी देवी प्रत्येक को 2 लाख 23 हजार 200 रुपए राजकोष में जमा कराने के लिए पाबंद किया था लेकिन जमा नहीं करवाया गया। इस पर विकास अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि इन सभी दोषियों के विरूद्ध एक सप्ताह में एफआईआर दर्ज करवाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। 
यह थे निर्देश: 
शासन सचिव एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के आयुक्त के आदेशानुसार राज्य वित्त आयोग चतुर्थ के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान के उपयोग हेतु दिशा निर्देश दिए गए थे। इन निर्देशों में राशि के उपयोग बाबत प्रतिबंध में यह स्पष्ट किया था कि यह राशि चार दिवारी (स्कूल चार दिवारी के अतिरिक्त) सामुदायिक हॉल, चबूतरा, स्वागत द्वार एवं हथाई बनाने के कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके बावजूद कनिष्ठ अभियंता महीपाल कटारा ने दिशा-निर्देशा व नियमों का उल्लंघन करते हुए तकनीकी स्वीकृति मय तखमीना, माप पुस्तिका, उपयोगिता एवं कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर राजकीय राशि का दुरूपयोग किया।