
विकास कनवा
नवलगढ़ - गिरधारी इन्दोरिया एक समाजसेवी होने के साथ साथ धर्मपरायण व्यक्ति भी है जो अपने धर्म में पूर्णआस्था रखने वाले और संस्कारो के धनि है। इन्दोरिया कहते है की समाज में चाहे स्त्री हो या पुरुष सब बराबर है। जिस तरह से आज कन्याओ के संख्या कम हो रही है वो आने वाले समय के लिए ठीक नहीं है। आज उन्होंने एक पोस्ट में लिखा की बेटियां नहीं बचाओगे तो अष्टमी कैसे मनाओगे। वाकई ये चिंता जनक है। जब नवरात्र आता है तो अष्टमी और नवमी को कन्याओं भोजन कराया जाता है। कन्याये माता के रूप में आशीर्वाद देती है। जहाँ भी अष्टमी और नवमी होती है वहां हर घर में कम से कम 9 कन्याओं की आवश्यकता होती है। जिस तरह से कई जगह कन्या भ्रूण को मारा जा रहा है उससे लगता है की अष्टमी और नवमी को कोई भी कन्या आशर्वाद के लिए नहीं मिलेगी। लड़के कुवारें ही रहेगे। बेटों की माँ बहुओं के लिए तरस जाएगी।