खबर - विकास कनवा
जयपुर। गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने राजस्थान कारागार बिल-2016 नये जेल नियम-अधिनियमों पर चर्चा करते हुए कहा कि नये बिल में बंदियों द्वारा परिहार, सजा की अवधि को कम करने एवं पैरोल को जिले की समिति द्वारा निरस्त करने पर अपील के प्रावधान रखा जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि इससे उच्च न्यायालय में पैरोल संबंधी याचिकाएं कम प्रस्तुत होंगी। कटारिया शुक्रवार को शासन सचिवालय स्थित अपने कक्ष में नये राजस्थान कारागार बिल-2016 पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बंदियो का इतना बड़ा मानव श्रम हमारे पास उपलब्ध है, हमें उसका किसी अच्छे कार्य में सदुपयोग करना चाहिये। इससे जहां कैदी की दिनचर्या व्यवस्थित होगी वहीं वह बुरे समय को भुलाकर अपना दिमाग नयी सोच विकसित करने में लगायेगा। गृहमंत्री ने बैठक में नये बिल के लिये गठित कमेटी में सम्मिलित नये प्रावधानों की विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि नये नियम अधिनियमों में ऎसे बदलाव होने चाहिये कि जेल में आने वाले हर व्यक्ति को सुधारात्मक एवं सृजनात्मक गतिविधियों में शामिल कर समाज की मुख्य धारा में लाने एवं कारागार से रिहाई के बाद समाज में पुर्नस्थापित होने में मदद मिल सके। उन्होंने कमेटी को निर्देश दिये कि बंदियों को जेलों में प्रदत्त प्राथमिक सुविधाओं में और सुधार के प्रावधान भी रखे जायें। बैठक में प्रमुख शासन सचिव गृह दीपक उपे्रती ने बंदियों के कन्विक्स पीरियड एवं ट्रायल पीरियड पर चर्चा करते हुए सुझाव दिया कि नये बिल में किसी बंदी के अच्छे व्यवहार और कार्य का आकलन भी सकारात्मक रूप से करने का प्रावधान रखा जाये। पुलिस महानिदेशक जेल श्री अजीत सिंह ने सुझाव दिया कि यदि कोई बंदी अन्य राज्य का राजस्थान की जेल में सजा काट रहा है तो उसे उसी राज्य में स्थानान्तरित किया जा सके, जहां का वह निवासी है ताकि बाकी सजा वह अपने राज्य में काट सके। इस अवसर पर निदेशक अभियोजन श्री देवेन्द्र दीक्षित, न्यायाधीश राजेन्द्र सिंह चौधरी सहित डीआईजी जेल श्री जयनारायण शेरा भी उपस्थित थे।
