विकास कनवा
जयपुर। प्रदेश में नवजात शिशुओं की देखभाल हेतु स्थापित विशेष नवजात देखभाल ईकाईयों, कुपोषण उपचार केंद्रों एवं अन्य ईकाईयों पर कार्यरत चिकित्सकों एवं नसिर्ंगकर्मियों के लिए नियमित रूप से ओरियेंटेशन कार्यक्रम संचालित किये जायेंगे। स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से समन्वित प्रयास कर इन केंद्रों की गहन मानिटरिंग की जायेगी। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती वीनू गुप्ता ने प्रातः स्वास्थ्य भवन में बुधवार को आयोजित निपी राज्य समन्वय समिति की बैठक में यह जानकारी दी। बैठक मेें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, नार्वे इंडिया पार्टनरशिप ईशियेटिव (निपी) एवं जापाईगो के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित शिशु स्वास्थ्य गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की गयी। भरतपुर, दौसा एवं अलवर में स्वयंसेवी संस्था निपी के सहयोग से घर आधारित नवजात देखभाल एवं सहयोगी पर्यवेक्षण (एफबीएनसी प्लस) कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। श्रीमती गुप्ता ने निपी, जापाईगो के सहयोग से एएनएम एवं जीएनएम प्रशिक्षण केंद्रों, घर आधारित नवजात देखभाल एवं सहयोगी पर्यवेक्षण कार्यक्रम, परिवार केंद्रित देखभाल कार्यक्रम, बीमार नवजात देखभाल ईकाईयों की विस्तार से समीक्षा की एवं आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्होंनें 2016 के वर्ष में दिये गये कायोर्ं की समीक्षा के साथ ही आगामी वर्ष की कार्ययोजना की भी समीक्षा की। मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन श्री नवीन जैन ने बताया कि प्रदेश में 73 प्रतिशत एएनएम एवं जीएनएम प्रशिक्षण केंद्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण सामग्री, कक्षाकक्षों, प्रायोगिक दिशा-निर्देशों, प्रायोगिक प्रशिक्षण, एवं प्रबंधन सहित विभिन्न मापदण्डों पर काफी प्रगति की है। लाईब्रेरी, कम्प्यूटर लैब तथा प्रोजेक्टर्स के माध्यम से नसिर्ंग विद्यार्थियों के शिक्षण के परिणाम भी दृष्टिगोचर हो रहे हैं। उन्होंने पिछले दो वषोर्ं में एएनएम एवं जीएनएम प्रशिक्षण केंद्रों में किये गये कायोर्ं की जानकारी दी। जापाईगो के डा. सोमेश कुमार ने बताया कि नसिर्ंग कालेज कोटा का विभिन्न मापदण्डों पर मूल्यांकन फरवरी 2015 में 29 प्रतिशत से बढ़कर नवम्बर 2016 में 69 प्रतिशत हो गया है। नार्वे की काउंसलर सुश्री रणवीग राजेंद्रम ने प्रदेश में नवजात शिशु सुरक्षा की दिशा में किये गये प्रयासों की सराहना की। बैठक में निदेशक आरसीएच डा. वी.के. माथुर के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न अधिकारीगण मौजद थे।
