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आदिवासियों ने हिन्दुस्तान की असली संतान होने का फर्ज निभाया है : सुरेश मीणा

विकास कनवा                  
आदिवासियों की कुर्बानी व्यर्थ नही जाने देंगे                                 
भारत सरकार के राष्ट्रीय कार्निवाल में ट्राईबलो के हित में दिल्ली में उठाई मीणा ने आवाज  
नई दिल्ली। आदिवासियों ने जन्मो से इस देश के जल-जंगल और जमीन की रक्षा कर माँ भारती की असली औलाद के रूप में सच्ची सेवा की है। दिल्ली के प्रगति मैदान में भारत सरकार के द्वारा आयोजित राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव में देश के जनजातीय समुदाय की आवाज बुलंद  करते हुए राजस्थान के आदिवासी मीणा नेता सुरेश मीणा किशोरपुरा ने कहा कि आज बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि इस हिंदुस्तान का सबसे पहला निवासी आदिवासी का जीवन संकट में है। इसके साथ ही उन्होंने बताया की देश के छत्तीसगढ़ , झारखंड , तेलंगाना आदि प्रान्तों में नक्शलवादियो द्वारा आए दिन जनजाति के लोगो को खनीज सम्पदा के चलते न सिर्फ जंगल-जमीन से बेघर किया जा रहा है बल्कि मौत के घाट भी उतारा जा रहा है। उनका कहना था कि यहां के आदिवासियों की जमीन उनकी सम्पति नही बल्कि उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा भी है।  यहां जीवन बसर करने वाले इन भाईयो का पत्थर मिट्टी पेड़ पौधो से आत्मीय रिश्ता है। उन्होंने बताया कि आदिवासियों पर अत्याचार छत्तीसगढ़ , झारखंड में हो रहा हो तो उसका विरोध गुजरात , मध्यप्रदेश , राजस्थान में भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में हमारी जनसंख्या 40 करोड़ है मतलब 40 प्रतिशत के बावजूद भी देश की सरकारो में हमारा प्रतिनिधित्व नाम मात्र का है। अतः देश की सत्ता में भागीदारी ही हमारा आरक्षण है, लेकिन जागरूकता और एकता के आभाव में हमारे साथ अत्याचार हो रहे है। हम जब-जब भी अपने अधिकारो की बात करते है तो मनुवादी हल्ला बोल कर कहते है कि देश खतरे में है। उन्होंने कहा कि आज हम सरकार एवं खुद की मेहनत से कुछ स्तर तक पहुंचने में सफल हुए है। लेकिन आदिवासी भाईयो हमे अभी बहुत आगे तक जाना है। उन्होंने  कहा कि बिरसा मुंडा और गोविन्द गुरु जैसे सेकड़ो आदिवासी भाईयो ने हमे आजादी दिलाने के लिए अपना सारा जीवन समर्पित कर अपने परिवार तक को कुर्बान कर दिया। इन कुर्बानियो को हम व्यर्थ नही जाने देंगे। उन्होंने आदिवासियों को मतभेद भुलाकर संगठित होकर एक राह पर चलने का सन्देश दिया। उन्होंने भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में जनजातीय मंत्रालय खोलने एवं प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव की शुरुआत पर खुशी व्यक्त करते हुए सरकार का आभार प्रकट किया। अंत में उन्होंने देश के आदिवासियों के चहुमुखी विकास के लिए 30 से अधिक मांगो का सरकार को ज्ञापन दिया।